मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 2026: स्नान-दान मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

मकर संक्रांति (Makar Sankranti) सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और मंगलमय पर्व है, जो प्रकृति, सूर्य उपासना एवं मानव जीवन के सामंजस्य का प्रतीक माना जाता है। इस त्योहार को भारत के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे मकर संक्रांति, गुजरात और महाराष्ट्र में उत्तरायण, तमिलनाडु में पोंगल तथा असम में माघ बिहू के रूप में जाना जाता है। नाम भिन्न होने पर भी इस पर्व का मूल भाव समान है—सूर्य देव की आराधना और दान-पुण्य का महत्व।

मकर संक्रांति का यह उत्सव सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है। यह वह समय होता है जब सूर्य उत्तरायण दिशा में गति करना प्रारंभ करते हैं और खरमास की समाप्ति के बाद शुभ काल की शुरुआत होती है। धार्मिक रूप से यह समय अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है तथा आत्मशुद्धि और पुण्य संचय के लिए विशेष परिणामदायी है।

मकर संक्रांति 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का शुभ पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन का पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से प्रारंभ होगा, जबकि महा पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से शाम 04:58 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस कालखंड में किए गए स्नान, दान और पूजा अत्यंत श्रेष्ठ और फलदायी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व बेहद गहरा है। यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं। उत्तरायण काल को आध्यात्मिक उन्नति का काल कहा गया है। इस समय किए गए जप, तप, ध्यान और दान-पुण्य का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

शास्त्रों में वर्णित है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती या किसी भी पवित्र जलधारा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट होते हैं। साथ ही ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान देने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व

मकर संक्रांति का उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में मिलता है। महाभारत के अनुसार, भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण काल का ही चयन किया था। मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इस काल को अत्यधिक पवित्र माना जाता है।

कृषि-प्रधान भारत में मकर संक्रांति सामाजिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह पर्व नई फसल के आगमन का संकेत देता है। किसान समुदाय इस दिन सूर्य देव और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करता है। सूर्य देव को ऊर्जा, जीवन, सत्य और तप का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है।

मकर संक्रांति की पूजा विधि

मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल उठकर शुभ मुहूर्त में पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर ही स्नान कर सकते हैं। स्नान के दौरान निम्न मंत्रों का जप करें—

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं सः बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।

स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा के लिए तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें पुष्प, तिल, गुड़ तथा रोली डालें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य अर्पित करते समय “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके बाद सूर्य देव को तिल के लड्डू, खिचड़ी और अन्य व्यंजन अर्पित करें तथा आदित्य हृदय स्तोत्र या सूर्य चालीसा का पाठ करें। अंत में सूर्य देव से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना करें।

मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व

बिना दान के मकर संक्रांति का पर्व अधूरा माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान कभी नष्ट नहीं होता, बल्कि अक्षय फल प्रदान करता है। जरूरतमंदों, भूखे व्यक्तियों, ब्राह्मणों और दीन-दुखियों की सहायता करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है।

अन्न और भोजन का दान

इस दिन अन्नदान का अत्यधिक महत्व है। खिचड़ी का दान करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। तिल और गुड़ का दान करने से धन, सम्मान और समृद्धि में वृद्धि होती है। भूखे व्यक्ति को भोजन कराना मां अन्नपूर्णा की अनुकंपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

वस्त्र दान

मकर संक्रांति पर वस्त्र दान भी अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। गरीबों, असहायों और वृद्धों को वस्त्र, कंबल या स्वेटर देना शुभ माना गया है। इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति बढ़ती है।

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: मकर संक्रांति 2026 कब मनाई जाएगी?
उत्तर: वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी।

प्रश्न: इस दिन स्नान कहां करना चाहिए?
उत्तर: किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करना सर्वोत्तम माना जाता है।

प्रश्न: इस अवसर पर किन वस्तुओं का दान करना चाहिए?
उत्तर: अन्न, तिल-गुड़ और वस्त्रदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

प्रश्न: मकर संक्रांति पर किस देवता की कृपा प्राप्त होती है?
उत्तर: इस दिन सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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Krishna Mishra writes for Insights of Hinduism, where he shares heartfelt thoughts on festivals, traditions, and the timeless wisdom of Sanatan Dharma. His aim is to keep the essence of Hindu culture alive in a way that feels simple, authentic, and relatable to everyone.